🟠Let us each Pledge to Read the Constitution of India, which we honor today!

⚪Just as there is a code of conduct which governs our body, made of five elements, which we follow to remain healthy and successful; so too do we collectively as a people accept the Constitution as a guiding code of conduct for our Nation and National Identity.

🟢Republic Day of India, or ‘Gantantra Divas’ commemorates the establishment of the Constiution of India after the establishment of an independent nation. It is important for each citizen to be familiar with our constitution, which we honor today.

🟠संविधान एक धर्म का भी होता है एवं एक राष्ट्र का भी होता है। दोनों के प्रति लोगों की आस्था का होना अति आवश्यक है।

⚪भारत जैसे राष्ट्र के लिए ये कह सकते है की, धर्म के संविधान के प्रति आस्था आवश्यक है पर राष्ट्र के संविधान के प्रति सभी नागरिकों की आस्था एवं निष्ठा अनिवार्य है।

🟢भारत की स्वतंत्रता के बाद जनता ने एक प्रजातांत्रिक व्यवस्था का स्वीकार कीया है उसमे प्रजाजनों ने स्वयं अपने लिए एक व्यवस्था बहोत चर्चा और चिंतन के बाद बनाया उस व्यवस्था को भारतीय जनता ने गंततंत्र दिन पर अपनाया।

🟠राष्ट्र पहले स्वाधीन होता है। उसके पश्चात एक व्यवस्था के द्वारा द्वारा अपने आपको एक प्रजातांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित करता है।

⚪जिस प्रकार नियमित जीवन एवं योग्य पोषक तत्वों से ये पंच महाभूतों से बना शरीर मजबूत होता है। उसी प्रकार निर्धारित व्यवस्था के अनुसार अपनाये हुए संविधान के अनुसार राष्ट्र के नागरिक निष्ठा पूर्वक व्यवहार करें, अपने जीवन का व्यापन करें और राष्ट्र को ही केंद्र में रखकर जीए, राष्ट्र को प्राथमिकता दे तभी देश मजबूत होता है।

🟢सही मायनों में देश को मजबूत या तो कमजोर उस देश के नागरिक ही बनाते है। जिस प्रकार अपने देह को मजबूत बनाना या तो दूसरों के आधार पे जीने के लिए मजबूर बनाना अपने ही हाथों में है।

🟠जैसे नियमित जीवन एवं योग्य पोषक तत्वों से शरीर मजबूत होता है। जिस प्रकार योग्य नियम एवं अनुशासन पूर्वक चलने से एक संस्था मजबूत एवं प्रतिष्ठित बनती है, वैसे ही राष्ट्र के नागरिक संविधान का निष्ठा एवं आदर पूर्वक पालन करें तो राष्ट्र मजबूत होता है।

⚪हम जिस प्रकार भगवान की प्रतिमा को आस्था पूर्वक प्रणाम करते है, उसी प्रकार उसी आस्था, श्रद्धा एवं आदर के साथ हम राष्ट्र ध्वज को सलामी देते है।
वह केवल विधि या कर्मकांड मात्र नहीं है पर वह सच्ची भावना है जिससे सही मायनों में देश बनता है।

🟢जैसे हम हमारे शास्त्रों एवं सद्ग्रंथों की आस्था पूर्वक पूजा करते है। शास्त्रों के अनुसार जीवन जीना पुण्य है एसा मानके शास्त्रों के आदेश का पालन करते है। उसी प्रकार राष्ट्र के संविधान की भी पूजा होनी चाहिए। वह पूजा याने संविधान का अध्ययन करके उसपे चर्चा विचारणा करके उसको समजने का प्रयास करके उसका पालन करना चाहिए।

🟠जिस व्यवस्था को हमने अपनाया, जिस व्यवस्था के साथ हम जीते है, जिस व्यवस्था के अनुसार जीने के लिए हम बाध्य है। उसकी यदि हमको पूर्ण जानकारी न हो तो उस हद तक हमारा प्रजातंत्र कमजोर होता है।

⚪संविधान का अध्ययन करके उसपे चर्चा विचारणा करके उसको समजने का प्रयास करने जैसा कुछ नया, अच्छा एवं आवश्यक कार्य करने का उत्साह राष्ट्र की जनता में होना चाहिए।

🟢हमारे संविधान का अधिक से अधिक जन समुदाय द्वारा अध्ययन करके उसपे चर्चा विचारणा करने से संविधान के प्रति नागरिकों की जागृति एवं आस्था बढ़ेगी और उसके द्वारा राष्ट्र प्रेम के चलते हमारा राष्ट्र मजबूत बने ऐसी पूर्ण संभावना है।

🟠नागरिक के कर्तव्य एवं अधिकार का जब तक नागरिक को अच्छी और सच्ची तरह भान नहीं होगा तब तक वह अपने कर्तव्य के प्रति पूर्णतः समर्पित नहीं होगा और अपने अधिकार के लिए जागृत नहीं होगा।

⚪एक प्रजातांत्रिक शासन व्यवस्था में नागरिक को अपने कर्तव्य एवं अपने अधिकारों का सम्पूर्ण रूप से ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है।

🟢जिस प्रकार धर्म की चर्चा महत्वपूर्ण है। जिस प्रकार कोई संस्था के सुचारू संचालन के लिए उसके वरिष्ठ अधिकारी एवं कार्यकर्ताओं की मंत्रणा एवं चर्चा आवश्यक है। उसी प्रकार राष्ट्र की मजबूती और उन्नति के लिए समाज के जागृत नागरिकों द्वारा संविधान का अध्ययन एवं उसपे चर्चा विचारणा महत्वपूर्ण है।

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