How can children be less attached on their mobile phones? बच्चे मोबाइल से लगाव कैसे कम करे?

How can children be less attached on their mobile phones and be inspired to use that time for devotion to God? How can parents support their children in doing so?

We hand over our mobile phones to little children. Sometimes mothers are busy with their chores and do not have time to look after their children, so they give their phones to children to play games.

We should keep children away from mobile phones as much as possible although I understand this is difficult, but it is best for them. I have seen children get easily bored with toys no matter how good the toys are. One week is the most they will spend time with these toys. On the contrary, they never get bored of playing on mobile phones.

At a small age, mobile might become the reason for the beginning of many health-related issues. Though there is some controversy on this, plenty of research is being carried out currently. Even then, one thing is definite that it is beneficial to keep small children away from mobile phones as much as possible, even though it is difficult. At a certain age when they get older, children who used to play with their father’s or mother’s mobile phone want mobile phones of their own.  This is fine, but before giving them the mobile, it is very important to give them the understanding and wisdom of how to use it.

Children spend more time nowadays on their phones than watching TV. Everything is there on your mobile device. It is fine if you use the mobile phone, but when mobile phones start using you, when it starts hugely eating into your time, it also becomes the reason for mental health problems. Without any reason, a person will keep checking their mobile phones and surfing on social media constantly. People are seated in the katha pavilion, arrived to listen to kathas, but they are not attentive in Katha, I observe such people. They keep busy with their mobile phones.

Mobile phone is the reason why children in urban areas are becoming sleep deprived. They have started cutting down on their sleep. Lack of sleep damages your memory greatly. Due to less sleep, the appetite reduces. Ultimately, your energy remains low. This in return reduces enthusiasm and when enthusiasm reduces you become uninterested in doing many things. You do not like to study and eventually things start getting worse.

So mobile is a good thing. We cannot oppose that and they are needed in the current times. But before handing over the mobile, it is necessary to teach children how to use it appropriately, to what extent, and in which places.
It is not necessary to quit using a mobile phone, but at least one can think of decreasing its use. My children, you might not be interested in devotion but if you do your studies with dedication then that also is devotion. Concentrate on your studies.

Many devices give you weekly reports on your screen time. They show you that last week you used your phone for so many hours and this week it has increased or decreased by 2 hours for instance. It provides all this information so that you can make any decisions or improvements you desire.

Technology is amazing, provided we use it wisely. So people who are interested in devotion, should spend time in spiritual practices and those who are interested in something else, can also reduce the number of hours spent on mobile and utilize that time for reading, studying or even playing. Just go out and play. Spend some time with nature. Go to the jungles, gardens, sit at a riverbank. If you are living in a flat then go out and sit in the balcony, go out of the home, sit under the shade of a tree and watch the birds chirping on it. Listen to them. Watch the birds singing sweet songs. When was the last time you watched the open sky at night?  Our Rishis taught us astronomy by observing the sky.

Thus, understand when, how and how much to use your mobile phone. Spend some time with nature and family. We have started living in the virtual world so much that we have thousands of friends virtually, we are connected with the whole world, but we are disconnected from our families. That should not be the case. It is necessary to understand and implement how to use our mobile phones wisely.

बच्चे मोबाइल से लगाव कम करके वो वक्त भगवत भक्ति में कैसे प्रेरित हो?

छोटे-छोटे बच्चों को हम मोबाइल पकड़ा देते हैं। कभी-कभी माताओं को अन्य कोई काम होता है और बच्चों को संभालने का इतना समय नहीं होता तो बच्चों को खेलने के लिए मोबाइल थमा देते हैं, हाथ में। एक तो छोटे बच्चों को मोबाइल से जितना दूर रखा जाय उतना अच्छा है | कठिन बहुत है। बढ़ियावाले खिलौने लाकर बच्चों को दो, मैंने देखा है कि वो एक आधे दिन में उन खिलौनों से ऊब जाते हैं। महंगेवाले खिलौने हो फिर भी उनसे ऊब जाते हैं, लेकिन मोबाइल की माया नहीं छोड़ती है, अंत में उस खिलौने को भी छोड़कर बच्चे को मोबाइल चाहिए।

मोबाइल की जरूरत पड़ेगी लेकिन छोटी उम्र में मोबाइल अनेक प्रकार की स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं को प्रारंभ करने में कारण भी बन सकता है। इसमें काफी कुछ विवाद है कि यह असर करता है कि नहीं करता है, बहुत से रिसर्च हो रहे हैं कि हकीकत क्या है? लेकिन एक बात तो पक्की है कि छोटे बच्चों को मोबाइल से जितना दूर रखा जाए उतना अच्छा है, कठिन बहुत है | थोड़े बड़े हो गए तो उन्हें अपना मोबाइल चाहिए एक उम्र के बाद | कोई बात नहीं | लेकिन मोबाइल देने से पहले मोबाइल का उपयोग करने की बुद्धि और विवेक देना यह बहुत जरूरी है। आजकल मैंने यह भी सुना है कि बच्चे जितना टीवी नहीं देखते उतना मोबाइल के साथ रहते हैं|

आप मोबाइल फोन को यूज़ करो ठीक है मोबाइल फोन आपको यूज़ करने लग जाए तो इतना ज्यादा आपका टाइम ही खा जाए, एक मानसिक बीमारी का कारण भी बन जाता है | बेवजह हर समय में आदमी अपने मोबाइल को चैक करता रहता है; वजह हो तब तो ठीक है लेकिन बेवजह हम घर में बैठे हैं तब भी बगल में पड़ा है मोबाइल, सीधा मोबाइल को चैक करेंगे। सोशल मीडिया पर क्या-क्या आया है वह सब चेक करते रहेंगे।

यह मोबाइल ही कारणभूत है कि अब खास करके शहरों के बच्चे की नींद कम होने लगी हैं| कम निद्रा तुम्हारी स्मृति शक्ति को बहुत ज्यादा डैमेज करती है, कम निद्रा के चलते भूख का लगना भी कम होता है, कम निद्रा के चलते आपका एनर्जी लेवल भी डाउन रहने लगता है और उसी के चलते उत्साह की मात्रा भी कम होने लगती है| उत्साह की मात्रा के कम होने के चलते फिर बहुत कुछ करने का मन नहीं होता, पढ़ने में रुचि नहीं होती और अंत में सब बिगड़ता ही चला जाता है|

तो मोबाइल अच्छी बात है;  मोबाइल का हम विरोध नहीं कर सकते और बिना मोबाइल के जो आज की दुनिया है वह चलेगी भी नहीं लेकिन मोबाइल हाथ में पकड़ाने से पहले मोबाइल किस तरह से यूज़ करना चाहिए उसका विवेक बच्चों को कराया जाए । किस तरह से उसका उपयोग करें, कितना उपयोग करें, कहां पर उपयोग करें ?

बैठे हैं कथा के पंडाल में, आए हैं कथा सुनने और ध्यान हमारा कथा में नहीं है । मैं दर्शन करता हूं ऐसे कई श्रोताओं का वह अपने मोबाइल के साथ ही व्यस्थ रहते हैं |

बच्चा तुम्हारे जैसे तो सब लोग इतने भक्ति में रुचि लेने वाले नहीं होते लेकिन मोबाइल तो छोड़ने की सोच ही सकते हैं । मोबाइल का उपयोग छोड़ने की नहीं, मोबाइल का उपयोग थोड़ा कम करने की तो सोच ही सकते हैं | भक्ति में चाहे तुम्हारी रुचि न हो तो चलो अपनी स्टडी दिल से करो वह भी भक्ति है, स्टडी में ध्यान दो। हम मोबाइल का विरोध नहीं कर रहे । हम यह नहीं कहते कि मोबाइल का यूज मत करो, जरूरी है आज के समय में लेकिन उसके साथ बिताने वाले घंटे कम कर दो।

आजकल तो मैंने देखा है मोबाइल में की एक हफ्ते के बाद रिपोर्ट देते हैं कि इस आपका स्क्रीन टाइम इतना था, , इतना इस हफ्ते में आपका दो घंटा बढ़ा है या दो घंटा कम हुआ है वह लोग हिसाब देते हैं तुमको कि अब तुमको जो निर्णय करना हो जो सुधार करना हो वह आप लोग करो ।

तो जिसकी भक्ति में रुचि है वह भक्ति करें लेकिन जिस की भक्ति में रुचि नहीं हो वह भी मोबाइल का उपयोग तो थोड़ा इसके घंटे थोड़े कम करके, वह समय थोड़ा पढने में, अभ्यास में, अरे कुछ नहीं तो खेलने में बाहर निकलो यार खेलो, प्रकृति के सानिध्य में बिताओ थोड़ा समय, जंगलों में जाओ, गार्डन में जाओ, कहीं नदी के किनारे जाकर बैठो, अपने फ्लैट में रहते हो तो फ्लैट की गैलरी में बाहर निकल के या अपने मकान से थोड़ा बाहर निकल कर के पेड़ के नीचे थोड़ा बैठो और पेड़ पर चहचहाती चिड़ियों को देखो, सुनो पंछियों को गीत गाते देखो। रात्रि के समय में, पता है तुमने कितने समय से खुला आसमान नहीं देखा होगा | ऋषियों ने इसी तरह दर्शन करके पूरा खगोल शास्त्र हमको समझाया

वर्चुअल वर्ल्ड में ऐसे जीने लगा है आदमी के उसमें बहुत सारे फ्रेंड्स हैं और पूरी दुनिया से कनेक्ट हो रहा है लेकिन घरवालों से ही डिस्कनेक्ट होता जा रहा है | ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए | विवेकपूर्वक बस हम उपयोग करें यह आवश्यक है।

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