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Source: Pujya Bhaishri at Khajani Institute, New Delhi(India) on 3rd March 2022

■”शिव” शब्द से “ई”कार नीकाल दो तो शव रहता है इसीलिए “ई” जो है वह शक्ति का स्वरूप है। इसीके अनुसार प्रत्येक पुरुष बिना शक्ति के निर्जीव हो जाता है।

#ShivShakti

■पूजा के प्रारंभ में दीपक की पूजा करी जाती है, सूर्य को पूजा जाता है। दीपक की पूजा तब होती है जब वह प्रज्वलित हो।

#LightingALamp

■दीपक प्रज्वलित होने से पूर्व जो एक पीठिका तैयार करी जाती है। मिट्टी का दिया सजाया जाता है उसमे तेल बाती रखी जाती है उसके आसपास रंगोली सजायी जाती है। तो उस ज्योत से दीपक का महत्व जरूर है पर उसका सौंदर्य सजे हुए दीपक की पीठिका के चलते है।

#RealBeauty

■वास्तव में श्रुष्टि एवं जीवन, पुरुष और प्रकृति दोनो की संवादिता पूर्ण भागीदारी से चलता है। बिना एक के दूसरा अधूरा है। लेकिन पुरुष और स्त्री दोनो की अपनी अपनी विशेषताएं भी है।

#Purush&Prakriti #HarmoniousPartnership

■हमारे यहां माँ भगवती को अष्ट भुजा कहा गया है क्योंकि हमारी नारीशक्ति बहुकार्यन क्षमता(multi tasking ability) से युक्त है। वह एक साथ बहोत सारे कार्य को न्याय दे सकती है। और उनका किया हुआ हरेक कार्य अपने आप में पूर्णता से खिलता भी है।

#AshtBhuja #Multitasking

■पुरुष को एक काम पूर्ण करने के लिए संपूर्ण एकाग्रता चाहिए । कार्य करते समय यदि कोई विघ्न आये तो उसकी एकाग्रता भंग हो जाती है।
सामान्यतः वह एक समय पर एक ही काम कर सकता है।

#Concentration

■पुरुष अपनी कमाई हुई संपति से केवल मकान बना सकता है। लेकिन उस मकान को घर बनाने की जिम्मेदारी हमारी मातृशक्ति की है।

#HomeMaker

■दुनिया की आधी आबादी ऐसी हमारी मातृशक्ति बिना विकसित हुए रह जाएगी तो दुनिया का विकास उतनी मात्रा में कम होगा और उतनी ही मात्रा में पुरुष का विकास भी कम होगा। इसीलिए हम स्त्री सशक्तिकरण की बात करते है।#WomenEmpowerment
■प्रत्येक बेटी एवं हरेक आत्मा कई सारी संभावनाओं से भरा हुआ है। उन संभावनाओं को अच्छी तरह से चरितार्थ करने के लिए उन्हें एक मंच देना आवश्यक है।

#InherentPotential #GenuinePlatform

■पुरुष एक गद्य है और स्त्री एक कविता है। गद्य कभी कठिन एवं नीरस हो जाता है। स्त्री एक कविता है जिसमे एक छंद है एक लय है। कविता का वास्तविक अर्थ वही नहीं होता जो उसका वाच्यार्थ होता है। उसकी अर्थ छायाँए महत्वपूर्ण होती है।

#Prose #Poetry #RealMeaning

■एक स्त्री का चेहरा जब उतरा हुआ हो और पुरुष उसको न पढ सके तो चाहे वह विदेश से पढ़ लिख के कितनी भी बड़ी उपाधियां प्राप्त करके लौटा हुआ क्यों न हो वह अनपढ़ ही है। फिर चाहे वह पुरुष पति हो, पिता हो या एक भाई हो।

#Feelings

■हमारी मातृशक्ति कभी अपने लिए शिकायत नहीं करती वह अपने पूरे अस्तित्व को पीघाल करके अपने ही जीवन के अस्तित्व का एवं साँसों का अपने परिवार में निवेश करती हुई अपने आप को सबके लिए खर्च करती रहती है। अपनी पूरी जिंदगी दे देती है।

#Dedication #Selfless #NeverComplain

■उस मातृशक्ति को केवल उपरोक्त बलिदान के लिए ही नहीं अपितु राष्ट्र के विकास के लिए भी तैयार करने का एक मंच देना पड़ेगा। हमारी मातृशक्ति को पंख देने होंगे। पंख लग जाने के बाद उनको उडनेके लिए आसमान भी देना होगा।

#GiveThemWings #SkyIsTheLimit #PartnerInDevelopment

■पंख देने के बाद हमारी मातृशक्ति के लिए प्रतिबंधों का पिंजड़ा न बनाया जाएं। लेकिन वह मातृशक्ति रूपी पंछी स्वयं विवेक से युक्त हो ताकि उड़कर उनको कहाँ जाना है क्या करना है उसका विवेक एवं अनुशासन उनके पास हो।

#Restrictions #Discrerion #Discipline

■निश्चितरूप से स्त्री सशक्तिकरण केवल मातृशक्ति के विकास के लिए ही नहीं अपितु समाज उत्थान एवं राष्ट्र की मजबूती के लिए भी आवश्यक है।

#WomenEmpowerent #SocialUpliftment #StrengthofNation

Click here to watch more: स्त्री का तप एवं सहनशीलता | मातृशक्ति वंदना

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