Sandesh by Pujya Bhaishri Rameshbhai Oza

During the second Sundarkāṇḍa Pātha, which took place on Saturday, 9th January, 2021, Pujya Bhaishri explained the importance of regularly performing a “Brahma Yajñá” (study of scriptures along with listening to, reflecting upon and implementing the words of saints), one of the five daily offerings (yajñás) that every householder (Gṛhastha) should engage in.

Wherever there is Śrī Rāma Kathā, we first invoke Śrī Hanumānaji, because in reality, he is the organiser (āyojaka); the life-breath (prāṇa); the protector (rakshak); as well as the head listener (pradhāna śrota) for this divine undertaking of Śrī Rāma Kathā. This invocation of Śrī Hanumānaji through the devotional singing of these Sundarkāṇḍa Pāthas is the true ‘spiritual dias’ for the nine-day Śrī Rāma Kathā that will be taking place next month (13th-21st February, 2021).

|| Śrī Sītā Rāma Sharanam ||

Stay Tuned for weekly Sundarkāṇḍa Gems from Sandipani Vidyaniketan, as we welcome Śrī Rāma Kathā (hosted by Sanskruti Foundation-U.K.) during the 15th Pātotsava of ShriHari Mandir from February 13th-21st, 2021 at Porbandar and virtually across various platforms.

This second of six events was co-hosted by Sanskruti Foundation (USA), Sanskruti Foundation (Canada) and Vidya Vikas Charitable Trust, USA (VVCT Trust).

Śrī Arvindbhai Patel, Śrī Ashishbhai Thakar, Śrī Ramnikbhai Sanghani and Śrī Reshmaben Bhakta of SF-USA, and Śrī Nirmalaben Raninga and Śrī Kishorbhai Jani of SF-Canada; along with Śrī Ashokbhai Mehta, Śrī Sujalbhai Popat and Śrī Anilbhai Dadheech of VVCT Trust (USA) all joined this event—along with various devotees from around the world who have pledged to this series of devotional singing.

VVCT Trust (USA) is dedicated to the mission of promoting education in rural areas, and has been involved with Devka Vidyapeeth since 2012, and with Sandipani Vidya Sankul (Saputara) from its very beginning.

All proceeds from the Yagya of the upcoming Śrī Rāma Kathā are dedicated to this educational initiative for ādivāsi (tribal) children in Saputara.

The musical rendition of this Sundarkāṇḍa Pātha was done by Rishi Śrī VipulKrishna (Shāstri M.A. B.ED) of Sandipani Vidyaniketan, and his team of graduate Rishis including Śrī Narendrabhai Vyas, Śrī Hiteshbhai Vohra, Śrī Rajeshbhai Joshi and Śrī Ketanbhai Maheta.

Śrī Vipulkrishna Śastri has previously served as a personal attendant to Pujya Bhaishri in his Katha Yatra for many years, and is himself an authentic Kathākāra who now narrates the glories of the Lord around the world, speaking on scriptures such as the Śrīrāmcaritmānasa, Śrīmad Bhāgavat Mahāpurāna, Śrī Shiv MāhāPurāna.

Click on the link below to immerse yourself in the second (of the six) Sundarkāṇḍa Pāthas, which took place on Saturday, 9th January, 2021.

Report by Shivani Suchak, Reshma Bhakta & Nimisha Sadhu.

द्वितीय सुन्दरकाण्ड पाठ एवं पूज्य भाईश्री द्वारा संदेश

दि.०९/०१/२०२१शनिवार

ईसा के नए वर्ष का दूसरा सुन्दरकाण्ड पाठ आज निवेदित हुआ । प्रथम पाठ वर्षके प्रथम दिन हुआ, नववर्ष के उपक्रम में पाठ संपन्न हुआ था । देश-विदेश के कई भक्त पूर्ण भक्ति से सम्मिलित भी हुए । आज एकादशी और शनिवार साथ है और द्वितीय पाठ का गायन हुआ । ऋषि विपुलकृष्ण वेगडाजी ने पाठ का गायन किया । इस द्वितीय सुंदरकांड पाठ के आयोजक संस्कृति फाउंडेशन यु.एस.ए,  व्रज-भागीरथी ट्रस्ट (VBCT) यु.एस.ए  और संस्कृति फाउंडेशन केनेडा रहे और वे सभी वर्च्युअली जुड़े भी रहे ।

हम कथा में चर्चा करते है, पंचयज्ञ की । उसमें से एक है ब्रह्मयज्ञ । वेद, शास्त्र, ऋषिओं की वाणी का नित्य स्मरण हो वह जरुरी है । उन हितवचन का पारायण होता रहे, जिससे अमृत वचन विस्मृत ना हो । अतः पाठ का महत्त्व दर्शाया गया है । कोई भी भगवत् तत्त्व के अंश को लेकर, उनको माध्यम बनाकर पाठ/स्तुति होते हैं । 

ऋषिमर्यादा से जीवन-यापन करनेवाला ब्राह्मण, वेद-पाठशाला में ऋषिकुमार द्वारा संहिता पाठ हो वह ब्रह्मयज्ञ है । सुन्दरकाण्ड में हनुमानजी का महत्त्व है, वह भी भक्त है ।

आनेवाले हरि मंदिर के पाटोत्सव से पहले प्रत्येक शनिवार को सम्पूर्ण विश्व के भक्त साथ मिलकर सुन्दरकाण्ड का पाठ करेंगे ।

फरवरी, २००६ में जब मंदिर महोत्सव हुआ उसके १ वर्ष पूर्व उसकी तैयारीयाँ शुरू हो गई थी । यह पाटोत्सव भी बहुत ही महत्त्वपूर्ण पड़ाव है । उसकी भी तैयारी शुरू हो चुकी है । परिस्थिति और सरकार के निर्देश अनुरसार सब इकट्ठे होंगे । सभी मर्यादाओं को ध्यानमें लेते हुए उत्सव मनाएँगे । 

पाटोत्सवमें होने जा रही श्रीराम कथाकी अभी से एक आध्यात्मिक पीठिका तैयार हो रही है । श्रीहनुमानजी आयोजनके “!१.प्राण २.रक्षक ३.प्रधान श्रोता” है । अतः सर्वप्रथम उनका आवाहन करते है । 

“आइए हनुमन्त बि राजिए कथा कहु मति अनुसार”

U.S.A. के तीनों ट्रस्ट को साधुवाद । निष्ठा से श्रीराम सेवा में समर्पित ही नहीं सेवा करते करते रिजाने से सद्गुरु कृपा बनी रहे ।

प्रत्येक मास में सत्संग करने की चर्चा हुई थी । गत मासमें धोलकिया परिवार ने गीता ज्ञानयज्ञ की सेवा करी । इस मास का सत्संग अभी बाकी है । January में श्रीहरि कृपासे विशिष्ट मनोरथ-सेवा होने जा रही है । सप्तदिवसीय भागवत कथा । उसमें विशिष्ट क्या है ? मेरी जन्मभूमि देवका (अमरेली के पास) में तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री श्रीमोदीजी द्वारा देवका विद्यापीठ का उद्घाटन हुआ था । 

अभी सांदीपनि और देवका में भी परीक्षाएँ संपन्न हो रही है । तक़रीबन ९० जितने ऋषिकुमार अभी सांदीपनिमें उपस्थित है । बहुत भरा भरा लगता है ।

जहाँ मैं खेला, जहाँ बड़ा हुआ । मेरी उम्र १३-१४ साल की रही होगी । तब खेल-खेलमें  गीताज्ञान यज्ञ हुआ था, तब तो हम सब छोटे बच्चे थे । वही कारण बना पाठशाला में अभ्यास करने का, बादमें जा केकथा सेवामें जुड़ गया । इस माहमें जन्मभूमि देवका से आप सभी को संबोधित करूँगा । पहली बार उस जगह से कथा होने जा रही है । 

Social Media के माध्यम से आप को भी उस भूमि और स्थान की झलक दिखेगी । २५ से ३१ january तक कथा होगी । वहाँ की यजमान-पद की सेवा वहाँ का आहिर समाज करनेवाला है । 

अधिक मास में zoom के द्वारा देश-विदेश के बहुत सारे लोग जुड़ें । तदनुरूप इस कथामें भी सब जुड़ेंगे । आप सबको देखकर सत्संग हो रहा है । यहाँ सब खाली होते हुए भी सब भरा हुआ लग रहा है । क्यूंकि आप सब भाव से भरे हुए हो । पूरे लगन और उत्साह से हम जुड़ेंगे । 

पाटोत्सव से पहले और चार शनिवार आ रहे है और चार पाठ संपन्न होंगे ।हम सब निर्भिक हो अपने कर्तव्य में लगे रहे ऐसी प्रार्थना । परिस्थिति के अनुरूप हम आनंद लेंगे ।  

Transcript by Paresh Joshi

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