What is Brahma Muhurta and what should one do at this time? ब्रह्म मुहूर्त किसे कहते हैं और उसमे क्या करना चाहिए?

Pujya Bhaishri, it is said that one must wake up before sunrise and this time is known as Brahma muhurta. So, what is Brahma muhurta? At this time, in Brahma muhurta, after waking up, what should a spiritual aspirant do?

This universe is operating in a rhythm. Our body is also a part of this universe and it has a rhythm. For example, it feels hungry at the right time, it feels sleepy at the right time. If the body demands something, we understand this and provide it on time, such that when hungry, we leave 100 tasks and sit to eat; when sleepy, unless it is extremely important, we leave everything and go to sleep. The second and third prahara (subdivisions of time of 3 hours each) of the night provide ideal rest to the body.

Look at the behaviour of birds. At dawn, they return to their nests. You can hear their songs on trees. As soon as night falls, they all become quiet and fall asleep. Early in the morning, once again, the same chirping and singing begins as they wake up. Then, they fly, go to look for food, or begin to make their nests. This way, they live a beautiful and natural life.

So, in the first prahara of the night, one completes all the tasks. In the second and third prahara one sleeps then wakes up in the fourth prahara.

This period of early in the morning, around 4.30am, is known as Brahma muhurta.

Why is it known as Brahma muhurta? Because, at that time, the state of the body and mind is such that, we can easily engross our mind in the Supreme Almighty.

One cannot sleep without the tamogua (quality of inertia) and without rajogua (quality of activity), one cannot perform actions. In the day, the mode of activity dominates, hence we are busy working. Due to the mode of activity, we possess qualities such as: material desires, anger, greed.

śri-bhagavān uvāca

Kāma ea krodha ea rajogua samudbhava       SBG 3.37

Material/sensual desires and anger arise from the quality of activity.

Rajaso lobha eva ca – God says in Gita.

Greed also manifests from the quality of activity.

So, we perform our actions based on all these arising from the quality of activity and these three: material desires, anger and greed can be put to good use.

For instance, be angry on our weaknesses. Otherwise anger becomes our weakness.

Be greedy such that as much as possible, do what you intended for tomorrow today, what you intended for today now. Similarly, make the most of now, who has seen tomorrow? This is also a type of greed, that the current moment is in our hands, let as make the most of it through virtuous deeds.

Direct desires towards God also.

Thus, in the day, the mode of activity dominates and at night the mode of inertia dominates.

What happens in Brahma muhurta? We have woken up from sleep, so we are coming out of the quality of inertia and we have not started to perform our duties. We are not dominated by the quality of activity, so this period in between is dominated with the mode of goodness (sattvagua). Thus, dusk is given great importance. When the effect of the mode of goodness is high, the mind is calm and then it is easy to engross the mind in God. This meditation in Brahma muhurta is also very blissful.

However, for this, one thing is important, that you will need to sleep early. Today, our lifestyle is such that we sleep very late. Due to this, our body needs greater rest. I have seen many people, many elderly people, many great leaders’ lifestyle, that between 9pm and 9.30pm they go to sleep and wake up between 4pm to 4.30pm. They then reflect on God and oneself. If necessary, in the afternoon, they will take a nap for half an hour to an hour so that the body gains the rest it requires, and the full benefit of Brahma muhurta can be gained.

In addition, the effect of ozone is higher at this time. Our doctors and Yogis teach us that walking at this time and filling the lungs with ozone is very healthy physically. But for this, the rhythm of the body must be maintained, this is imperative.

What is disease? It is the break in harmony of the body. Let us maintain the harmony and rhythm of our body so that we can benefit from the best time of Brahma Muhurta for worship.

ब्रह्म मुहूर्त किसे कहते है और इसका लाभ कैसे उठाना चाहिए ?

ये सृष्टि एक लय में चल रही है | हमारा शरीर भी इस सृष्टि की ही इकाई है | शरीर का भी एक लय है | ठीक समय पर भूख लगती है, ठीक समय पर नींद आती है | यदि शरीर की उस माँग को हमने ठीक-ठीक से समजा और उसी समय पूरा किया कि जब भूख लगी तो सौ काम छोड़ करके भोजन के लिए बैठ गए | फिर जब नींद आने लगी तो सिवाय कि बहुत ज्यादा अनिवार्यता हो हम बाकि सबकुछ छोड़कर के शयन के लिए चले गए |

रात्रिका द्वितीय और तृतीय प्रहर शरीर को सबसे बडा आराम देता है | आप दिनमें फिर सो लो फिर वो वाला आराम नहीं मिलेगा |

आप पंछीयोंके भी व्यवहार को देखो | संध्या होते ही तुरंत अपने घरोंमें वापस लौट आएँगे | संध्या समयमें पेड़ों पर गीत सुने पड़ेंगे | जैसे ही रात उतर आई, सब शांत, सब सो जाते है और भौर सुबह फिर वही संगीत, वे तुरंत जाग जाते है | उड़ते है चारा चुगने के लिए या अपना घरोंदा बनाने के काममें लग जाते है | बहुत अच्छे से पंछी कुदरती जीवन जी रहे है |

यदि रात्रि के पहले प्रहर तक अपने सारे काम निपटा कर, दूसरे और तीसरे पहर में सो जाए और फिर यदि चौथे पहर में जाग जाए..

वही जो भौर सुबह वाला समय है, ४:३० के बाद वाला समय ब्राह्म मुहूर्त कहलाता है |

इसको ब्राह्म मुहूर्त क्यों कहते है ? क्योंकि उस समय शरीर की और मनकी स्थिति ऐसी होती है कि हम परब्रह्म में अपने को स्वाभाविक रूपसे लगा सकते है | 

बिना तमोगुणके आदमी सो नहीं सकता और बिना रजोगुणके आदमी कर्म नहीं कर सकता | दिनमें ज्यादातर रजोगुणका प्रभाव होता है तब हम कर्ममें प्रवृत्त होते है और रजोगुण के चलते काम है, क्रोध है, लोभ है |

काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः


ये काम-क्रोध रजोगुण से उत्पन्न है |

रजसो लोभ एव च


लोभ भी रजोगुण से ही होता है |

रजोगुण के चलते हम कर्म करते हैं और उन तीनों का (काम-क्रोध-लोभ) सदुपयोग भी हो सकता है |  क्रोध करें अपनी कमजोरियों पर अन्यथा क्रोध ही कामजोरी बन जाता है | लोभ करें तो,

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब ।

पल में प्रलय होएगी,बहुरि करेगा कब ॥

वो भी एक लोभ है कि ये पल हमारे हाथमें हैं | उसका जितना हो सके हम सदुपयोग करें | कामना को भी परमात्मा से जोड़े |

कामही नारी पियारी जिमी लोभी प्रिय जिमी दाम | तिमी रघुनाथ निरंतर प्रिय लागहु मोहि राम ||

दिनमें तो होता है रजोगुण का प्रभाव और रात्रिको होता है तमोगुण का प्रभाव | तो फि…

ब्राह्म मुहुर्तमें क्या होता है ? हम निद्रा से जाग्रत हो गए तो तमोगुण के प्रभाव से बाहर आ रहे है और अभी हम कर्म में प्रवृत्त नहीं हुए है तो रजोगुण हम पर हावी हुआ नहीं | ये बिच वाला जो समय है वो सत्त्वगुण के प्रभाव वाला होता है | इस लिए संध्या समय हमारे यहाँ महत्त्वपूर्ण माना गया | ये सत्त्वगुणका प्रभाव जब होता है तो मन शांत होता है | तब ब्राह्म मुहूर्त का वो ध्यानसे परमात्मामें मनको लगाना सरल भी होता है और बड़ा आनन्ददायक होता है |

लेकिन उसके लिए एक बात है कि आपको सोना भी जल्दी पड़ेगा |

आजकल हुआ ये कि हम बहुत देर से सोते है और उसके चलते फिर शरीरको आराम की भी उतनी ही जरुरत पड़ती है | मैंने देखा है कई लोगोंकी, महापुरुषों की जीवनशैली ऐसी है कि नौ-साडे नौ को शयन के लिए चले जाते है | और फिर चार-साडे चार बजे जाग्रत हो जाते है और ब्रह्म-चिन्तनमें लग जाते है | दोपहरमें यदि जरुरत पड़ी तो आधा घंटा-एक घंटा वामकुक्षी कर लिया | तो शरीर को पूरा आवश्यक आराम भी मिल जाता है और ब्राह्म मुहुर्तका तब लाभ भी मिल सकता है |

सुबह-सुबह ओज़ोन का प्रमाण बहुत ज्यादा और बढ़िया होता है | उस समय चलना, फेफ्ड़ोंमें ओज़ोन को भरना तो वो शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी कितना लाभप्रद है ये तो हमारे डॉक्टर और योगी सिखाते ही है | लेकिन उसके लिए शरीर के लय को हम ठीक से बनाये रखे ये बहुत जरुरी है |

रोग क्या है ? शरीरका लय तूटे वही रोग है | इस लयको हम बनाए रखे | तो इससे हम ब्राह्म मुहुर्तका उपयुक्त समयका भजनका लाभ ले सकते है |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Fill out this field
Fill out this field
Please enter a valid email address.
You need to agree with the terms to proceed